सामान्य प्रश्न
वास्तु आनंदा घर, फ्लैट, व्यावसायिक और औद्योगिक स्थानों के लिए वास्तु सेवाएँ उपलब्ध हैं।
प्रॉपर्टी खरीदने, किराये पर लेने या निर्माण से पहले वास्तु जाँच, लेआउट का विस्तृत विश्लेषण, वास्तु दोषों के समाधान और फ्लोर प्लान या डिज़ाइन सुधार की सलाह भी दी जाती है।
हाँ, दोनों सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
आप हमारे कार्यालय में आकर ऑफलाइन परामर्श ले सकते हैं, और आवश्यकता होने पर साइट विज़िट भी तय की जा सकती है।
ऑनलाइन परामर्श भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको बस अपना फ्लोर प्लान इंटरनेट से हमें भेजना होगा।
हाँ, भारत के बाहर रहने वाले क्लाइंट्स के लिए भी हमारी रिमोट कंसल्टेशन सेवाएँ उपलब्ध है। हम USA, UK, UAE और अन्य देशों के क्लाइंट्स के साथ भी काम करते हैं।
परामर्श से पहले, हमारे वास्तु विशेषज्ञ आपके लेआउट को वास्तु डायग्राम की मदद से देखते हैं। वे दिशाओं, क्षेत्रों और जगह में कहाँ असंतुलन है, यह वास्तु सिद्धांतों और वास्तु पुरुष मंडल के आधार पर समझते हैं। परामर्श के दौरान आपको वास्तविक और आसान सुझाव दिए जाते हैं, और आपके सभी सवालों के जवाब भी दिए जाते हैं।
ऑनलाइन परामर्श के लिए आपको अपनी समस्या और भूमी का फ्लोर प्लान साझा करना होता है, जिसमें उत्तर दिशा साफ़ दिखनी चाहिए।
आप स्थान की तस्वीरें भी भेज सकते हैं। यदि संभव हो, तो तस्वीरों पर दिशाएँ भी मार्क कर दें, इससे अधिक सटीक मार्गदर्शन देना आसान होता है।
हमारे वास्तु विशेषज्ञ वास्तु पुरुष मंडल और अन्य सिद्धांतों के आधार पर स्थान का गहराई से अध्ययन करते हैं।
इसके बाद, विशेषज्ञ आपको लेआउट, दिशाओं और आसान बदलावों के बारे में साफ़ और सीधे तरीके से सलाह देते हैं।
हमारे वास्तु विशेषज्ञ गलत प्रवेश दिशा, कमरों की अनुचित स्थिति, ऊर्जा प्रवाह में रुकावट और मुख्य क्षेत्रों के असंतुलन जैसी समस्याओं की पहचान करते हैं।
इसके बाद बेहतर स्वास्थ्य, रिश्तों में सुधार, आर्थिक प्रगति और मानसिक शांति के लिए व्यावहारिक समाधान सुझाए जाते हैं।
हाँ, मौजूदा जगहों पर भी बिना बड़े बदलाव के वास्तु लागू किया जा सकता है।
आमतौर पर इसमें दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार चीज़ों की सही प्लेसमेंट करना शामिल होता है, जैसे बेड या टेबल की स्थिति बदलना, कमरे का उपयोग उसके सही ज़ोन के अनुसार करना, या प्रवेश और घर मे आनेजाने को बेहतर बनाना।
नहीं, पहले से कोई जानकारी या वास्तु शास्त्र ज्ञान का होना ज़रूरी नहीं है। विश्लेषण में वास्तु पुरुष डायग्राम जैसे यंत्रों का उपयोग किया जाता है, लेकिन सलाहकार सब कुछ सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाते हैं।
हाँ, वास्तु में सही माप बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि छोटे अंतर भी क्षेत्रों और प्लेसमेंट को प्रभावित कर सकते हैं।
स्पष्ट फ्लोर प्लान, सही दिशाएँ और सटीक माप होने से हर क्षेत्र का वास्तु सिद्धांतों के अनुसार सही विश्लेषण किया जा सकता है।
इस कोर्स में आप वास्तु का अर्थ, उसके मूल सिद्धांत, दिशाएँ, क्षेत्र, मकान वास्तु शास्त्र, वास्तु पुरुष मंडल और इन सिद्धांतों को वास्तविक स्थानों पर कैसे लागू किया जाता है, यह सीखेंगे।
नहीं, मूलभूत (Basic) कोर्स वास्तु की बुनियादी बातों जैसे "वास्तु क्या है?" से शुरू होता है और धीरे-धीरे आपकी जानकारी बढ़ाता है।
हालाँकि, उच्च (Advanced) कोर्स के लिए मूलभूत (Basic) वास्तु की पूर्व जानकारी ज़रूरी हो सकती है।
हम लाइव (ऑनलाइन) क्लासेस लेते हैं।
वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है जो बताता है कि स्थानों की योजना प्रकृति के साथ सामंजस्य में कैसे बनाई जाए। यह दिशाओं, पाँच तत्वों और सूर्य प्रकाश व चुंबकीय ऊर्जा जैसी प्राकृतिक शक्तियों के संतुलन पर आधारित है।
यह बताता है कि विभिन्न गतिविधियाँ कहाँ होनी चाहिए—जैसे प्रवेश, बैठने या भंडारण का स्थान—ताकि जगह स्थिर, व्यवस्थित और वहाँ रहने वालों के लिए सहायक हो।
पूर्व (East)और उत्तर (North) को सुबह की रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण (South) और पश्चिम (West) स्थिरता और भारी कार्यों से जुड़े हैं।
वास्तु पुरुष मण्डल, वास्तु शास्त्र का एक महत्वपूर्ण चित्र (आरेख) है, जिसका उपयोग पारंपरिक भारतीय वास्तुकला में सदियों से होता आया है।
यह वास्तु पुरुष का प्रतीक है — एक ब्रह्मांडीय पुरुष, जिसका शरीर भवन की संरचना से जुड़ा माना जाता है। इस अवधारणा के अनुसार, भवन का निर्माण दिशाओं, नवग्रह और प्रकृति की शक्तियों के साथ संतुलन में होना चाहिए।
सामान्यतः उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में प्रवेश द्वार को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि वहाँ सुबह की धूप आती है और यह स्वागत-योग्य माना जाता है।
सटीक प्रवेश स्थान प्लॉट, सड़क की दिशा और आसपास की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। दरवाज़े की दिशा या दहलीज़ में छोटे बदलाव भी प्रवेश संबंधी समस्याओं को सुधार सकते हैं।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व (अग्नि तत्व, South-East) दिशा सबसे उपयुक्त है।
चूल्हा इस प्रकार रखें कि खाना बनाते समय मुख सिर्फ और सिर्फ पूर्व (E) की ओर हो। यदि रसोई की जगह बदलना संभव न हो, तो चूल्हे की स्थिति बदलना, वेंटिलेशन सुधारना और हल्के रंगों का उपयोग करना व्यावहारिक विकल्प हैं।
दक्षिण-पश्चिम (South-West) दिशा को स्थिरता और अच्छी नींद के लिए मुख्य बेडरूम हेतु सबसे उपयुक्त माना जाता है। वास्तु नियमों के अनुसार, इस कोने को भारी रखना चाहिए।
यदि यह संभव न हो, तो पश्चिम (West) या दक्षिण (South) में बेड की सही स्थिति और उचित रंग/प्रकाश से काम चलाया जा सकता है। बेहतर विकल्प उपलब्ध होने पर उत्तर-पूर्व में बेडरूम बनाने से बचें।
वास्तु के अनुसार मंदिर की दिशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व, North-East) सबसे उपयुक्त है, क्योंकि यहाँ सुबह की रोशनी आती है और यह कोना शुभ माना जाता है।
यदि उत्तर-पूर्व उपलब्ध न हो, तो पूर्व (East) दिशा दूसरा बेहतर विकल्प है। मूर्तियाँ या चित्र इस प्रकार रखें कि पूजा करते समय मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) की ओर हो।
हाँ। फ्लैट्स में हम बिना तोड़फोड़ के सुधार करते हैं—जैसे बेड और पढ़ाई की मेज़ की दिशा ठीक करना, फर्नीचर की सही जगह तय करना, दर्पण की स्थिति, रंग, प्रकाश और फालतू सामान हटाना।
इसके साथ ही उपकरणों की सही दिशा (चूल्हा, स्टडी डेस्क, टीवी) और छोटे स्थान-बदलाव भी सुझाए जाते हैं।
सामान्य सुधार: बेड या डेस्क की जगह बदलना, सोने की दिशा बदलना, दर्पण हटाना, रोशनी सुधारना, अनावश्यक सामान हटाना, रंग में मामूली बदलाव और पौधों को दिशा-अनुसार रखना।
बड़े बदलाव: रसोई की जगह बदलना, बाथरूम शिफ्ट करना, मुख्य प्रवेश द्वार की दिशा बदलना या संरचना में फेरबदल करना।
अनियमित आकार, कटे हुए कोने, टी पॉइंट प्लॉट वास्तु और ढलान वाली ज़मीन को सामान्यतः भूमी वास्तु दोष माना जाता है, जिसका निवारण आवश्यक होता है।
हाँ। दर्पण ऐसी जगह न लगाएँ जहाँ वे बेड का प्रतिबिंब दिखाएँ या मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने हों। लिविंग रूम में हल्के रंग और पूजा स्थल में हल्के व शांत रंगों का उपयोग करें।
भारी फर्नीचर दक्षिण (South) या पश्चिम (West) में रखें और घर का केंद्र (ब्रह्मस्थान) खुला और साफ-सुथरा रखें।
गृह वास्तु शास्त्र आपके घर या स्थान को दिशाओं, धूप, हवा और पाँच तत्वों के साथ संतुलित करता है।
जब यह संतुलन सही होता है, तो वातावरण स्थिर और सकारात्मक बनता है — जिससे निर्णय लेने में स्पष्टता, आर्थिक स्थिरता, अच्छा स्वास्थ्य और रिश्तों में सुधार आ सकता है।
वास्तु शास्त्र एक पारंपरिक पद्धति है जो दिशाओं, प्रकाश, हवा और स्थान के संतुलन पर आधारित है।
इसे आधुनिक विज्ञान नहीं माना जाता, लेकिन इसके कई सिद्धांत वास्तुकला और पर्यावरण डिज़ाइन से मेल खाते हैं — इसीलिए यह आज भी सम्मानित है।